हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत नहजुल बलाग़ा किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال امیرالمومنین علیه السلام:
«أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ اَلْجِهَادَ بَابٌ مِنْ أَبْوَابِ اَلْجَنَّةِ فَتَحَهُ اَللَّهُ لِخَاصَّةِ أَوْلِیَائِهِ وَ هُوَ لِبَاسُ اَلتَّقْوَی وَ دِرْعُ اَللَّهِ اَلْحَصِینَةُ وَ جُنَّتُهُ اَلْوَثِیقَةُ فَمَنْ تَرَکَهُ رَغْبَةً عَنْهُ أَلْبَسَهُ اَللَّهُ ثَوْبَ اَلذُّلِّ وَ شَمْلَةَ اَلْبَلاَءِ ...»
हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली (अ) ने फ़रमाया:
"अम्मा बअद — तो जिहाद (सशस्त्र संघर्ष) जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा है, जिसे अल्लाह ने विशेष रूप से अपने चुनिंदा दोस्तों के लिए खोला है। यह परहेज़गारी का परिधान, अल्लाह की मज़बूत ढाल और सुरक्षित कवच है। जो व्यक्ति इससे मुँह मोड़ेगा (इसे छोड़ेगा), अल्लाह उसे अपमान का वस्त्र पहनाएगा और मुसीबतों का आवरण ओढ़ा देगा..."
नहजुल बलाग़ा, ख़ुतबा 27
आपकी टिप्पणी